Tuesday, December 31, 2019

सुमित दहिया की कविताएँ

1.परिवर्तन का नियम

 

दुनिया में

केवल एक चीज़ ऐसी है

जिसमे कभी परिवर्तन नही होता

और वह है

 

"परिवर्तन का नियम"

 

2.आनुपातिक प्रेम

 

किसी ने मेरे शरीर के शत प्रतिशत हिस्से को

अपनी ऊर्जा के पच्चीस प्रतिशत हिस्से से चबा लिया

क्या इसी का नाम प्रेम है।

 

3.फिर वहीं मंज़र

 

मेरी आँखों मे नाखून उग आए है

और उन्हें अंदर तक खरोंच रहे है

प्रतिदिन, प्रतिपल

शायद निकालना चाहते है

फिर वहीं मंज़र

जो किन्ही परिस्थितिगत कारणों से

कहीं विलुप्त हो गया है।

 

4.मज़ाक

 

मज़ाक जैसी कोई चीज़ अस्तित्व में नही होती

दुनिया मे नही होती

मज़ाक केवल एक बहाना है

उन कठोर सच्चाइयों को हल्के-फुल्के ढंग से,

बयान करने का

 

जिन्हें असल भावनाओं के साथ व्यक्त्त करने से

कुछ रिश्ते हमेशा के लिए खत्म हो सकते है

मज़ाक केवल एक परिस्थिगत सुविधा है।

 

5.निम्नतम

 

जब आदमी सामान्य विचारों को सोचते-सोचते

अत्यधिक थक जाता है

फिर शुरुआत होती है, कुछ उच्चतम की

मगर अक्सर आदमी गिरता है निम्नतम में

क्योंकि उच्चतम अपने साथ अथाह संघर्ष लिए है

और निम्नतम भीड़ की सामान्य शैली है।

 

6.आईने के सामने

 

जब मैं आईने के सामने खड़ा होता हूँ

एक मोहब्बत मेरे बालो में हाथ फेरती है

एक मोहब्बत मेरे चेहरे से कील निकालती है

एक मोहब्बत मेरे कंधों को अक्सर दबाती है

एक मोहब्बत मुझे कुछ मीठा बोलना सिखाती है

 

लेकिन इनमें हमेशा एक बात नई होती है

कि हर बार मोहब्बत नई होती है।

 

7.तुम्हारा अहंकार

 

तुम अगर मेरे बारे में सोच रही हो

तो मेरी आँखों से थोड़ी नमीं ले लो

जिससे तुम्हारा अहंकार कुछ तरल हो जाये

ताकि वह आसानी से निकल सके

तुम्हारे दिलो-दिमाग से बाहर

तभी तुम्हारी आत्मा का मार्ग खुलेगा

 

तुम जिन बंधनो में बंधी रही हो

वे सभी बंधन मृत है, बाधाएं है

"समाज की सभी मर्यादाएं, प्रेम की आलोचना मात्र है"।

 

8.प्रेम की आभा

 

जब-जब मैंने प्रेम किया

तब-तब मैं चूक गया

आखिर मेरा किया कोई भी कार्य 

मुझसे बड़ा कैसे हो सकता है 

कर्ता की जमीन में कार्य का पौधा अंकुरित होता है

 

फिर जो मेरे प्रयासों के बिना घटा

उसमें ही प्रेम की स्वच्छ आभा थी।

 

9.आरक्षित जख्म

 

मेरे शरीर मे ज़ख्मो के लिए

अलग-अलग स्थान आरक्षित है

बिल्कुल वैसे ही जैसे एक्यूप्रेशर के पॉइंट्स होते है

ये सभी स्थान विभिन्न व्यक्तियों के लिए आरक्षित है

वो इन्हें अक्सर दबाकर ताज़ा करते रहते है

जब कभी उनसे बात या मुलाकात होती है

ये सिलसिला अरसे से यूँही जारी है

और इसके ख़त्म होने की संभावना भी नज़र नही आती।

 

 

"सुमित दहिया"

मोबाइल - 9896351814

हाउस न.7सी, मिस्ट होम सोसाइटी, हाइलैंड मार्ग, एयरफोर्स स्टेशन के पास, जीरकपुर, मोहाली ,पंजाब - 140603

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