मकर संक्रांति  पर्व  विशेष रचनाएं     
मकर संक्रांति  पर्व  विशेष रचनाएं     

 

        संक्रांति

 

उत्तरायण होकर सूर्य

पतंग संग  करें मस्ती ।

तिल - गुमूंगफली

बिना बेगानी संक्रांति ।।

 

दूर करती खुशियों से

मन में फैली जो भ्रांति ।

देती  रिश्तों में मिठास

मतभेद मिटाती संक्रांति ।।

 

ऊंची उड़ान भरें सद्भाव 

प्रेम से रहना सिखलाती ।

पोंगल तो कही  लोहडी 

रुप में मनातें हैं संक्रांति ।।

 


          पतंग

 

खुशियों की भरकर उड़ान

आसमान छू  रहीं हैं पतंग ।

लेकर  संग  धागें  की डोर 

प्रेम का  संदेश  रहीं पतंग ।।

 

जीवन जीना सिखाती पतंग

भर देती खुशियों  के नवरंग ।

शिखर   पर   पहुंचकर   भी 

करों  न  घमंड  कहती पतंग ।।

 

शिखर  पर  देखकर ख्याति

शत्रु तैयार रहते काटने अंग ।

हौंसलों की  भरकर  उडान 

जीत  जाती  है  जंग  पतंग ।।

 


बाल कविता

 

   पतंग और चूहा 

हाथी दादा लेकर आएं

बाजार से पतंग न्यारी ।

चूहा बोला मुझको दे दो

लगती है कितनी प्यारी ।।

 

चूहेजी ने पतंग का जैसे

ही पकडा मांजा - धागा।

नटखट  पतंग  के  संग

सर-सर उड गए चूहे राजा  ।।

 

गोपाल कौशल

नागदा जिला धार मध्यप्रदेश

      99814-67300