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Tuesday, January 7, 2020

 रिमोट जिंदगी का

सुशीला अपने पति हरीश के साथ ख़ुशी से गाँव में रह रही थी | बेटा और बहु दोनों दिल्ली मे एक कंपनी मे जॉब कर रहे हैं | काफी सालों से बेटा बाहर है इसलिए अकेले रहने की आदत पड़ी हुई है | हमेशा से अपने तरीके से जिंदगी जीने वाली सुशीला पर दुखों का पहाड़ टूट गया जब रात को ठीक से सोए हरीश सुबह उठे ही नहीं | उनके जाने के बाद जिंदगी वीरान हो गई | एक दो महीने तो सब रिश्तेदार बारी बारी से उसके पास रुकते रहे | लेकिन हमेशा के लिए कौन रुक सकता है आखिर तो अकेले ही रहना पड़ेगा | अब तो सुशीला को लगता जिंदगी ठहर गई है | समय जैसे रुक गया हो | बेटा बहु अपने पास बुला रहे थे लेकिन दुसरे लोगो की सख्त हिदायत याद आ जाती बड़े शहर में बिलकुल अकेली पड़ जाओगी | बहु बेटा भी किसी के पूछते हैं क्या ? दो महीने और बीत गए बेटा बहु आये तो माँ की हालत देखकर दुखी हो गए | ऐसे समय में बहु ने बड़े प्यार से बोला , “ माँ जी , जैसी जिंदगी हमें भगवान देता है उसे वैसी ही जीनी पड़ती है लेकिन उसका रिमोट हमारे ही हाथ में होता है | “ आप हमारे साथ चलिए , खुशियों को अपने तरीके से ढूँढना , ये आपकी जिंदगी है इसका रिमोट भी आपके हाथ है | उसे लगा बात तो ठीक है वहां भी मंदिर है , बच्चे है ,पास पड़ोस भी होगा ही जान पहचान में टाइम ही कितना लगता है दूसरों का साथ सभी को अच्छा लगता है  बहु की बातों से होंसला ले सुशीला साथ जाने की तैयारी में लग गई | 


 


      नीलम नारंग


      147/ 7 ,  गली न. 7 .


      जवाहर नगर , हिसार ( हरियाणा )


      मोबाइल न. 9034422845


 


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Aksharwarta September - 2022 Issue

 Aksharwarta September - 2022 Clik the Link Below Aksharwarta Journal, September - 2022 Issue