रिश्ते (कविता)
रिश्तों की डोर नाजुक ही होती है ।

सहज-सद्भाव से ही बंधी होती है।।

 

कुछ रिश्ते हल्के-भारी भी होते हैं ।

रिश्तों की उम्र छोटी-बड़ी होती है।।

 

रिश्ते तो आम तौर पर रिश्ते होते हैं।

रिश्ते निभाने की नीयत ही होती है।।

 

रिश्ते कुछ क्षणिक और अमिट होते हैं।

रिश्तों की प्रक्रिया भय-प्यार से होती हैं।।

 

रिश्ते भी आजकल नाम के ही होते हैं ।

कुछ रिश्तों की पहचान नाम से होती हैं।।

 

रिश्ते भी व्यक्तित्व व चरित्र से बनते हैं।

खून के रिश्ते की उम्र तो ताउम्र होती है।।

 

रिश्ते घर-समाज, देश दुनियाँ से जोड़ते हैं।

रिश्तों की दुनियाँ धूप-छांव जैसी होती है।।

 

रिश्ते कर्म-धंधे विविध भूमिका से होते हैं।

'नाचीज'रिश्ते की बुनियाद स्वार्थी होती है।

 

 

मईनुदीन कोहरी

"नाचीज बीकानेरी "

मोहल्ला कोहरियांन बीकानेर

मो--9680868028