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Saturday, February 15, 2020

मैं समय हूं

मैं समय हूं


 

 मैं समय हूँ 

फिर लौट कर आऊंगा 

सब गमों को चीरकर 

और ख़ामोशी से

 सबको चुप करवा जाऊंगा। 

 

 मैं समय हूं 

 सब जानता हूं 

 इसीलिए घबराता नहीं 

 चुपचाप सुनता हूं

 किसी को सुनाता नहीं।

 

 मैं समय हूं 

बीत कर भी मैं

 फिर वापस भी आ जाता हूं 

 और जब आता हूं

 तो सब कुछ 

 अच्छा बुरा दिखा जाता हूं। 

 

 मैं समय हूं 

 कभी रुकता नहीं 

थकता भी नहीं 

 फिर भी सब कुछ 

 बदल देता हूं अपने आगोश में। 

 


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Aksharwarta International Research Journal, February - 2023 Issue