Wednesday, March 4, 2020

कविताएं






नई अस्पृश्यताएँ
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समानताएं पहाड़ से गिरेंगी
और चकनाचूर हो जाएंगी


ज्ञान के कीड़े दिमाग के सड़े हुए नाद में
बजबजाएँगे!


बड़ी बड़ी बातों पर दंगल होंगे
और छोटी छोटी बातों पर लड़ाइयां


हर बड़ा छोटे को उसी नज़र से देखेगा?


जैसे कोई अधिकारी चपरासी को देखता है
जैसे बड़का वाला साहित्यकार
हाथ पांव मारने वाले को देखता है।
जैसे टीवी वाला पत्रकार
प्रिंट वालों को देखता है।
जैसे कोई बड़ा उद्योगपति
निरीह किसान को देखता है।


ठीक वैसे ही जैसे
बौड़म बुर्जुआ
गिरमिटियों को देखता रहा होगा
या अंग्रेज भारतीयों को देखते रहे हों


नई अस्पृश्यताएँ हैं  ये
जहाँ साहब के गिलास में
चपरासी नहीं पी सकता
चपरासी के गिलास में
किसान नहीं पी सकता
किसान के गिलास में मजदूर नहीं पी सकता
और मजदूर के गिलास में कोई याचक
#चित्रगुप्त
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नियति
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बच्चों को पढ़ाओ लिखाओ
इंजीनियर बनाओ, डॉक्टर बनाओ
बिजनेस मैन बनाओ
कोई भी काम सिखाओ
ताकि दंगाई आएं और मार दें


तिल-तिल काटो पेट
जोड़ो पाई पाई
एक एक ईंट जोड़ो
घर बनाओ
ताकि दंगाई आयें और सब जला दें


खूब किताबें पढ़ो
अच्छी अच्छी बातें सीखो
बड़ी-बड़ी बातें
जो कहने सुनने में अच्छी लगती हों
जिससे दंगाई आएं तो उन्हें समझाने जाओ
और वो तुम्हें चाकुओं से गोद दें
#चित्रगुप्त
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गोष्ठी
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एक ने कहा -"राजनीति भ्रष्ट है।"
दूसरे ने कहा-"पुलिस भ्रष्ट है।"
तीसरे ने कहा- न्याय ब्यवस्था ... हाय ! हाय ! हाय !
चौथे की चिंता किसी चौथे पर थी।
और पांचवे की पांचवे पर....


सबने सबकी वाजिब चिंताओं पर
वाजिब हामी भरी
दुःख ब्यक्त किया
रोष जताया


गोष्ठी की सबसे गौरतलब बात ये
कि सब अपने-अपने दफ्तर
बंक करके आये थे।
#चित्रगुप्त
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दो दृश्य
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(1)
राप्ती के उफान में
एक बबूल का पेड़ जो आधा डूबा है
उसकी शाखाओं पर
सांप, नेवले, खरगोश, बिल्ली
सब एक साथ बैठे हैं।
अपनी- अपनी जान बचाने की जुगत में
कोई किसी से नहीं लड़ रहा...
(2)
नदी सूख गई है
तटों पर तरबूज, खरबूज, और ककड़ियों की फसलें लहलहा रही हैं।
नेवला सांप के पीछे भाग रहा है और
बिल्ली खरगोश को खाने पर आमादा है


दोनों दृश्यों को एक साथ रखकर सोचता हूँ
'समरसता' आपदाओं में ही पनपती है
जीवों को परेशान होने का कोई कारण चाहिए
नहीं ये दूसरों को परेशान करने लग जाते हैं।
#चित्रगुप्त
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मैंने उससे कहा था-
कि दुनिया की बड़ी बड़ी बातों के पीछे
छुपी हुई
ओछी हरकतों की आकांक्षाओं को देखना
और फिर चुनना
क्या गलत है?
क्या सही है?


इसपर वो हल्के से मुस्कराई और बोली
'तू भी वही है'
#चित्रगुप्त
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जब वो प्रेम में थे


खूबियां ढूढ़ते थे


अब नहीं हैं


तो कमियां ढूढ़ते हैं
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नहीं पढ़े वेद पुरान
बाइबिल कुरान


नहीं पता धर्म कर्म
जाति सम्प्रदाय और स्थानीयता का मर्म


मुझे तो बस इतना याद है
कि राह चलते हुए
माँ अचानक चिल्लाई थी


"अंधे हो क्या दिखाई नहीं देता सामने चींटियां जा रही हैं और तुम उनपर ही चले जा रहे हो...."
#चित्रगुप्त
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खतरा
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जब वो कहते हैं..
खतरा है!
तो सचमुच का खतरा है!
उनके बनाये ईश्वर अल्लाह भगवान पर
इनके नाम पर बनाये गये आलीशान भवनों पर
इनके नाम पर लिखी गई गई किताबों पर
इनके नाम पर बनाये गये हर उस ढर्रे पर
जिसपर हमारे-आपके चलते रहने में ही उनकी भलाई है।


जब वो कहते हैं खतरा है
तो सचमुच का खतरा है
हर उस दीवार पर
जो इन्होंने उठाई है
और जिसपर रंगरोगन लगाकर
चमकाते रहना ही इनका पेशा है


जब वो कहते हैं खतरा है
तो सचमुच का खतरा है
इनके फैलाये गये अंधेरे पर
जिसके कायम रहने से ही
जल सकते हैं इनके घरों के चूल्हे
गल सकती है इनकी दाल
और जिसके बल पर ही
ये चुरा सकते हैं मेरे और तुम्हारे थाल की रोटी


जब वो कहते हैं कि खतरा है!
तो चादर तान कर सो जाओ
क्योंकि तब खतरा हम पर आप पर नही है
बल्कि इनके बनाये मजहब पर है
इनकी श्रेष्ठता पर है
इनकी ताकत पर है
इनकी सत्ता पर है......


उन्होंने कहा खतरा है!
हम और आप भिड़ गये
वे सुरक्षति हो गये।
#चित्रगुप्त
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जंगल
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कूकुर बिलार
भेड़िया सियार
बाज चील गिद्ध कौवे
लकड़बग्घे लोमड़ी बाघ
घाघ
सब रहते हैं इस आदमगत जंगल में
बस यहां पेड़ और आदमी नहीं रहते
#चित्रगुप्त
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#चित्रगुप्त
नाम- दिवाकर पांडेय 'चित्रगुप्त'
ग्राम- जलालपुर
पोस्ट- कुरसहा
जिला- बहराइच
उत्तर प्रदेश 271821
मोबाइल- 75260553738118995166
मेल- pandey divakar.pandey.dp@gmail.com



 

 



 



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