लघुकथा - कोरोना का ख़ौफ़
         पिछले कुछ दिनों से हर जगह कोरोना के बारे में लगातार खबरे चल रही है।अनिल इन बातों से काफी परेशान है।हर समय मन मे एक व्याकुलता बनी हुई है।अनिल एक पचास वर्षीय व्यक्ति है और एक हार्ट पेशेंट भी है।लगातार इन खबरों से एक घबराहट सी उसके मन मे बन गयी हैं।

 

          21 दिन के लॉक डाउन के कारण वो घर से भी कहीं नही निकल पा रहा था।लेकिन उसके इर्द गिर्द ये खबरे लगातार चल रही थी। एक ह्रदय रोगी होने के कारण उसे इन बातों से काफी डर लग रहा था।घर के अंदर भी हर स्थिति में उसे इन बातों को सुनना ही पड़ रहा था।

 

          श्याम को अपने मन को खुश करने के लिए वह पार्क में जाकर बैठा। घर के पास ही पार्क था इसलिए उसे इसमें बैठे में कोई आपत्ति नहीं लगी। लेकिन वहाँ भी जितने भी लोग उसके आसपास में बैठे हुए थे।वो सब भी कोरोना से मरने वाले लोगों के बारे में ही बातें कर रहे थे यहां आकर भी उसका मन काफी व्याकुल रहा।

 

           सारी बातों से थक कर दोबारा वो अपने घर चला गया।घर पर आने के बाद अपने मन से एक मूवी लगाई। तभी उसके बेटे ने बोला पापा कहीं समाचार लगा लो।समाचार लगाने के बाद फिर से वही खबरें उसे परेशान करने लगी।परेशान होकर अनिल अपने कमरे में पहुंचा और कमरे में जाने के बाद सो गया उसका मन काफी परेशान था।

 

          अनिल के मन मे कोरोना का ख़ौफ़ कुछ इस कदर हो गया था कि उसे बहुत देर तक तो नींद ही नही आई और ना जाने कब उस की आँख लग गयी और वो सो गया।सुबह जब अनिल के बेटे ने उसे काफी देर से उठाया और अनिल नही उठा।तब अनिल के बेटे को पता चला कि अनिल अपनी जीवन खो चुका था।

 

         कोरोना से जो होना था वह तो बाद की बात है लेकिन बार-बार उन्हीं बातों को सुनते-सुनते अनिल के दिल पर इतना जोर पड़ा कि शायद रात को ही उसने अपने प्राण त्याग दिए।

 

           *कहानी का सार सिर्फ इतना है कि लोगों को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इस तरीके के रोगियों के सामने कोरोना वायरस से होने वाली परेशानियों के बारे में हर समय जिक्र नहीं करते रहना चाहिए। कहीं ऐसा ना हो कि लोगों की बातें किसी के लिए खतरनाक बन जाए। कृपया ऐसे रोगियों से इस तरीके की बातें लगातार ना करें और उन्हें इन बातों से दूर रखे।*

 

 

नीरज त्यागी

ग़ाज़ियाबाद ( उत्तर प्रदेश ).