Aksharwarta Pre Pdf

Monday, May 18, 2020

कविता... 

(1 )कविता... 

 

पिता पुराने दरख़्त की

 तरह होते हैं! 

""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""

 

आज आंगन से

काट दिया गया

एक पुराना दरख़्त! 

 

मेरे बहुत मना करने 

के बाद भी! 

 

लगा जैसे भीड़ में 

छूट गया हो मुझसे 

मेरे पिता का हाथ! 

 

आज,बहुत समय के 

बाद, पिता याद 

आए! 

 

वही पिता जिन्होनें

उठा रखा था पूरे 

घर को 

अपने कंधों पर

उस दरख़्त की तरह! 

 

पिता बरसात में उस

छत की तरह थे.

जो, पूरे परिवार को 

भीगनें से बचाते ! 

 

जाड़े में पिता कंबल की

तरह हो जाते!

पिता  ओढ लेते थे

सबके दुखों को  ! 

 

कभी पिता को अपने

लिए , कुछ खरीदते हुए

नहीं देखा  ! 

 

वो सबकी जरूरतों

को समझते थे.

लेकिन, उनकी अपनी

कोई व्यक्तिगत जरूरतें

नहीं थीं

 

दरख़्त की भी कोई

व्यक्तिगत जरूरत नहीं

होती! 

 

कटा हुआ पेंड भी 

आज सालों बाद पिता 

की याद दिला रहा था! 

 

बहुत सालों पहले

पिता ने एक छोटा

सा पौधा लगाया

था घर के आंगन में! 

 

पिता उसमें खाद 

डालते 

और पानी भी! 

रोज ध्यान से 

याद करके! 

 

पिता बतातें पेड़ का 

होना बहुत जरूरी 

है आदमी के जीवण

में! 

 

पिता बताते ये हमें

फल, फूल, और 

साफ हवा

भी देतें हैं! 

 

कि पेंड ने ही थामा 

हुआ है पृथ्वी के

ओर - छोर को! 

 

कि तुम अपने 

खराब से खराब 

वक्त में भी पेंड

मत काटना! 

 

कि जिस दिन

 हम काटेंगे

पेंड! 

तो हम 

भी कट  जाएंगें

अपनी जडों से! 

 

फिर, अगले दिन सोकर 

उठा तो मेरा बेटा एक पौधा 

लगा रहा था 

 

उसी पुराने दरख़्त

 के पास , 

वो डाल रहा था 

पौधे में खाद और 

पानी! 

 

लगा जैसे, पिता लौट 

आए! 

और   वो 

दरख़्त भी  !! 

 

 

(2)कविता... 

 

चिड़ियों को मत मरने दो..

"""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""

 

चिड़ियों को मत मारो

उन्हें धरा पर रहने दो.

 

फुदकने दो हमारे घर

आंगन में

उनके कलरव को बहने दो! 

 

दुनिया के कोलाज पर

रंगों की छटा बिखरते

रहने दो ! 

 

मत मारो चिड़ियों को ! 

इन्हें धरा पर रहने 

दो! 

 

घरती भी मर 

जाती है चिड़ियों 

के मरने से! 

 

चिड़ियों के बच्चे भी मर 

जाते हैं

चिड़ियों के मरने से!

 

लाल, गुलाबी, नीले,

 पीले, चितकबरे, और हरे

रंगों के कोलाज को इस

धरा पर बहने दो! 

 

रंगों के रहने से ही

सपने भी रहते हैं जिंदा 

इसलिए भी 

चिड़ियों को मत मरने दो! 

 

इस धरा पर रंगों के कोलाज

को बहने दो  ! 

 

फुदकने दो हमारे 

घर आंगन में

उनके कलरव  को बहने दो!

 

मत, मारो चिड़ियों को उन्हें जिंदा  रहने दो!

 

 

(3 )कविता... 

 

संवेदना

..... 

 

बांध दो पट्टियां

गाय अगर दिखे

चोटिल! 

 

लगा दो  कुत्ते 

के जख्मों पर

 मरहम !

 

ठंड में दे दो

किसी बेजुबान को

बरामदा का कोई

कोना! 

 

पिला दो पानी 

उस परिन्दे को

जो प्यासा है! 

 

दे दो खाना 

उनको जो 

भूखे हैं! 

 

बांट लो दुख 

उनका जो दुखी हैं!

 

 

(4 )कविता... 

 

चुनौती को अवसर बनाईए.. 

""'"""""""""""""""""""""""""""""""""""""""“""""""""""""'""“""""""""""""""""""

 

लाल किले से एक मुनादी 

हुई थी.. 

कि इस विकट 

समय में  चुनौती

को अवसर 

बनाईए! 

 

जब भूख एक 

चुनौती थी ! 

 

तो वो अवसर कैसे 

बनती..?? 

 

मजदूरों  के लिए भूख 

एक चुनौती थी! 

तो वो उनके लिए अवसर

कैसे बनती...?? 

 

लेकिन, बिचौलियों

के लिए

भूख अवसर बनी! 

वो डकार गये मजदूरों का

भाडा ! 

 

और छोड दिया 

उन्हें मरने के 

लिए सडकों पर  ! 

और ले भागे  बिचौलिए 

मजदूरों की 

जीवण भर की कमाई! 

 

भूख किसी के लिए

चुनौती बनती  रही 

और ,किसी के लिए 

अवसर! 

 

महेश कुमार केशरी

 C/O -मेघदूत मार्केट फुसरो

 बोकारो झारखंड

पिन-829144

Aksharwarta's PDF

Avgat Award 2021 Function - Organised by Aksharwarta International Research Magazine & Sanstha Krishna Basanti, Ujjain, M.P., India

Avgat Award 2021 Function  Held on 19 September 2021  Organised by Aksharwarta International Research Magazine & Sanstha Krishna Basanti...