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Saturday, May 9, 2020

मैं आज भी वही हूं

बीत गया जो वक्त
तो अब क्यों
मुझे तलाश रहे हो।
जब थे आपके पास
तो बस आपके ही थे।
अब गैरों ने
जब बाहें पकड़ ली
तो क्यों अब
हताश और परेशान हो रहे हो?
क्या बीता हुआ बीता वक्त
अब याद आ रहा है,
या फिर बीते हुए लम्हों की
अपनी गलतियां
अब याद आ रही है?
तुम तो कहते थे
मुझे में बहुत कमियां है,
और मुझे में वो
काबिलियत नहीं
जो मोहब्बत करने वाले
आशिकों के पास होती है।
पर आज मुझ में
वो काबिलियत तुम्हें
कहाँ से दिखगी?
पर मैं तो आज भी वही हूं
नाजुक से दिल वाला
जो अपने दर्द से ज्यादा
दूसरों के दर्द को
ज्यादा महसूस करता हूं।


राजीव डोगरा 'विमल'
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
(भाषा अध्यापक)
गवर्नमेंट हाई स्कूल,ठाकुरद्वारा।
पिन कोड 176029


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Aksharwarta International Research Journal - January 2022 Issue

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