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Friday, August 28, 2020

चरित्रहीन

चरित्रहीन
 
बहुत दिनों से कहीं सवाल सता रहे थे, लेकिन उत्तर नहीं मिल रहा था। उसके उपाय भी...इसी समय पदमाबाई मिली,उसने कहा,
"रमेश  गांव कब आया?"
"दो माह हुए।"
"तेरी पढ़ाई कैसी शुरू है..."
"अच्छी।"
"आगे क्यां करने का सोचा है?"
"नौकरी के तलाश में हूं।"
"तुझे मेहनत का फल मिलेगा।"
जाने दो पदमाबाई जो होगा देखा जाएगा,आप का क्यां शुरू है, सब ठीक ठाक है न...हां...जो चल रहा है सही है समझो। जिस स्त्री को पति ने छोड़ दिया हो,उस स्री को  समाज के कहीं लोग  बुरी नज़र  से  देखते  हैं।  उसका  क्यां चलेगा? जो है अच्छा है।
"पदमाबाई सच- सच बताईए क्यां हुआ?"
"बताकर क्यां फायदा रमेश? जो चल रहा है उसे चलने दो।"
"पदमाबाई तुम्हें मेरी कसम क्यां हुआ साफ़- साफ़ बता दो।"
"तुझे प्रकाश साहब मालूम है न..."
"हां...गांव के प्रतिष्ठित, सुशिक्षित, चरित्रवान व्यक्ति..."
"वहीं प्रतिष्ठित, सुशिक्षित, चरित्रवान व्यक्ति...उसने मेरी ज़िंदगी बर्बाद की।"
"मतलब..."
तु विश्वास नहीं करेगा रमेश... लेकिन उसने मेरी मज़बुरी का फायदा उठाया...वोह मेरे ज़िस्म से खेलता रहा। मैं किसी को बता भी न सकी। कुछ ही दिनों में मुझे लड़की हुई। यह इल्जांम खुद पर आएगा, गांव में बदनामी होगी इसलिए उसने मेरे पति को ढूंढकर लाया।उसे पैसे दिए।जब तक पैसे थे तब तक वो रहा बाद में भाग गया। प्रकाश साहब का भी मन भरा था,अब वोह मेरी तरफ़ देखना नहीं चाहता था। लेकिन मैं  लड़की को पढ़ाउंगी। मेरी गलती की सज़ा उसे नहीं दूंगी। रमेश... उसने मेरी जैसी कहीं स्री की ज़िंदगी बर्बाद की।उसकी सच्चाई तुझे सुननी होगी।
"तुझे कोमलबाई पता है न..."
"हां... पता है।"
"उसे भी शिकार बनाया उसने।"
"ऐसी कहीं स्री उसके हवस की शिकार बनी।"
"उसे सिर्फ़ शरीर को नोचना आता है...भावना की कदर नहीं।"
"उसने उसकी ज़िंदगी ख़राब की इसी के साथ उसके लड़की भी..."
वो लड़की उसके बेटी जैसी थी,उसकी उम्र पंधरा साल ओर उसकी उम्र सत्तर साल...तब भी वोह शारीरिक शोषण करता रहा।  इतना करने के बाद भी उसका मन नहीं भरा।  उस लड़की की शादी होने के बाद भी कभी भी फोन लगाता था, मूर्ख...! एक दिन लड़की के पति ने फोन उठाया...उसे भूतकाल का पता चला इस कारणवंश उसने लड़की को कायम का छोड़ दिया।वो मां के पास रहती है।वो आज भी उसके ज़िंदगी से खेलता है।उसकी ज़िंदगी नर्ख बन गई है रमेश।वो जीकर भी मरी हुई है। वो मां की गलती की सजा भोग रहीं हैं।
    नाम में प्रकाश है... लेकिन कई व्यक्ति के ज़िंदगी में अंधेरा निर्माण किया। वोह कुत्ते की मौत मरेगा...मेरी बद्दुआ है...।इतना करके भी उसका पेट नहीं भरा रमेश...वो सही में दलाल है दलाल। गांव में विधवा,श्रावणबाळ निराधार योजना, पेंशन आदि योजना के लाभार्थी है उन लोगों से भी पांच सौ रूपय लेता है। जैसे उन्हें सरकार तनख्वाह नहीं देती हो।इतना ही नहीं तो जो आदमी मरा है उसके नाम पर आए पैसे भी खुद ही हड़पता है।गरीब लोगों का शोषण करता है... धमकियां देता है। लेकिन मैं उसे डरती नहीं हूं। मैंने विरोध नहीं किया तो वो कहीं ओर ज़िंदगी बर्बाद करेगा।   मैं   उसके ख़िलाफ़ अंत तक लढूंगी।  उसे  सजा  दिलाकर रहूंगी। तब तक मुझे सुकून नहीं मिलेगा...


 


वाढेकर रामेश्वर महादेव
                        हिंदी विभाग
       डाॅ.बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाडा          


विश्वविद्यालय,औरंगाबाद (महाराष्ट्र-431004)


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Aksharwarta International Research Journal, February - 2023 Issue