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Saturday, September 5, 2020

गुरू / शिक्षक

गुरू / शिक्षक
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मेरे उस्ताद जी मेरे गुरू जी
मुझ पर अनन्त कृपा आपकी
सौम्य अति प्रसन्न रुप आपका
आपके दर्शन ही है सुखकारी ।

तुम किसी संत से कम नहीं
आपकी सुन्दर मूरत ही न्यारी
ज्ञान का जो दान देकर मुझे
आपने ही बनाया था संस्कारी ।

मेरे मन के विकार सब दूर हुवै
जब से गुरुवर दर्शन लाभ हुवै
धर्म-कर्म दुनियाँ का ज्ञान दिया
जीवन भर का मैं हूँ आभारी ।

गुरू-उस्ताद बिन ज्ञान अधूरा
इनकी कृपा से ही जीवन पूरा
सृष्टि की अतुल्य निधि हो आप
"नाचीज" की नैया आपने तारी ।

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स्वरचित/ मौलिक
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मईनुदीन कोहरी " नाचीज बीकानेरी "
बीकानेर , राजस्थान


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Aksharwarta November 2021 Issue - Pre PDF

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