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Sunday, January 12, 2020

"वक़्त" कविता

मंजिल भी मिलेगी तुझे एक दिन,
तू हौसलों की उड़ान बनाता चल!
क्योंकि वक़्त बदलते वक्त नही लगता!!


खिलेगी मुस्कुराहट भी तेरी एक दिन,
तू अपनी हसीं से सबको हंसाता चल!
क्योकि वक़्त बदलते वक्त नही लगता!!


थिरक उठेगा तेरी जिंदगी का साज,
तू घुँघरुओ की झंकार बजाता चल!
क्योंकि वक़्त बदलते वक्त नही लगता!!


चमकेंगे जुगनू जरूर तेरी आँखों मे,
बस तू इस हर मोड़ को चमकाता चल!
क्योंकि वक़्त बदलते वक्त नही लगता!!


होगी हर खुशी जल्द तेरी झोली में,
तू बस मेहनत के रंग बिखराता चल!
क्योंकि वक़्त बदलते वक्त नही लगता!!


खिल उठेगा एक दिन तेरा ये उपवन,
तू मेहनत के बस फूल खिलाता चल
क्योंकि वक़्त बदलते वक्त नही लगता!!


लिखा है जो "मलिक" की कलम ने,
"अदब" से इस पर ध्यान लगाता चल!
क्योंकि वक़्त बदलते वक्त नही लगता!!



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Aksharwarta International Research Journal, March 2024 Issue