Saturday, February 29, 2020

ईश्वर की आवाज (कविता)

ईश्वर की आवाज


जो आया मेरे दर पर
बस कुछ न कुछ
मांगने आया।
पर कभी मांगा न मुझे
न मांगा मेरा
प्रेम तत्व मुझसे।
बस हताश रहा
मुक्ति के लिए,
और परेशान रहा
अपनी इच्छाओं के लिए।
बस ढूंढता रहा
लोगों में कमियां
न तलाशा की उनकी
आत्मा में मेरी अभिव्यक्ति।
अपनी घर की
चारदीवारी की तरह
मुझे भी बांटता रहा,
कभी मंदिर,कभी मस्जिद
कभी गिरजाघर के रूप में।


राजीव डोगरा 'विमल'
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश (युवा कवि लेखक)
(भाषा अध्यापक)
गवर्नमेंट हाई स्कूल,ठाकुरद्वारा।


No comments:

Post a Comment

Featured Post

 Aksharwarta International Research magzine  July 2021 Issue Email - aksharwartajournal@gmail.com