"दीप विश्वास का"
आओ एक दीप विश्वास का जलाएं हम,

 कठिन समय में आत्म बल नहीं डिगाएं हम।

 

 रूग्ण तन स्वस्थ हो, कोई रोगी न रहे,

 वायरस रूपी व्याधि का भुक्तभोगी न रहे,

 भारत मां का एकांत में आज वंदन हम करें,

 परम ब्रह्म का हृदय तल से स्मरण हम करें,

 जन-जन में अद्भुत राष्ट्रभक्ति जगाएं हम।

 आओ एक दीप विश्वास का जलाएं हम।

 

 चहुँओर तिमिर का साम्राज्य विशाल है,

 शत्रु के हस्त में वायरस रूपी करवाल है,

 मनोबल बढ़ेगा, भय क्षरण हो जाएगा,

 स्वत ही मनुज, ईष्ट की शरण हो जाएगा ,

आत्मविश्वास की अखंड ज्योति जलाएं हम।

 आओ एक दीप विश्वास का जलाएं हम।

 

 आज एक सौ तीस करोड़ भारतीय प्रण करें ,

वायरस रूपी शत्रु से मिलकर हम रण करें,

 हमारी एकता, अखंडता से हार अरि जाएगा,

 छोड़कर मैदान रोग अंतिम गति पाएगा,

 हृदय में प्रेम लौ मिलकर जगमगाए हम।

 आओ एक दीप विश्वास का जलाएं हम।

 

 समय नहीं रुदन का, बल्कि ललकार का,

 मौन रहकर  सुनें, संगीत  हृदय  यलगार का,

  मृत्यु का भय तजकर , जीवन का वरण करें,

 अब बहुत हुआ ,इस रोग का अंतिम चरण करें,

 मन की अद्भुत शक्ति से अपराजित कहलाए हम ।

आओ एक दीप विश्वास का जलाएं हम।

 

प्रीति चौधरी (मनोरमा)

जनपद बुलंदशहर

उत्तरप्रदेश