Sunday, February 23, 2020

रामदरश मिश्र के उपन्यासों में आँचलिकता

मिश्र ने अब तक कुल चैदह उपन्यासों की रचना की है जो क्रमशः ‘पानी के प्राचीर’, ‘जल टूटता हुआ’, ‘बीच का समय’ (आदिम युग), सूखता हुआ तालाब, ‘अपने लोग’, ‘रात का सफर’, ‘आकाश की छत’, ‘बिना दरवाजे का मकान, ‘दूसरा घर’, ‘थकी हुई सुबह’, बीस बरस’, ‘बचपन भास्कर का’, ‘एक था कलाकार है’।


मिश्र के उपन्यासों का अनुशीलात्मक अध्ययन करने पर कहा जा सकता है, उनके उपन्यास दो प्रकार के हैं।


आँचलिक उपन्यास और सामाजिक उपन्यास। आँचलिक उपन्यासों के अंतर्गत ‘पानी के प्राचीर’, ‘जल टूटता हुआ’ तथा ‘सूखता हुआ तालाब’ शामिल है, जबकि ‘बीच का समय’, ‘अपने लोग’, ‘रात का सफर’, ‘आकाश की छत’, ‘बिना दरवाजे का मकान’, ‘दूसरा घर’, ‘थकी हुई सुबह’, ‘बीस बरस’, ‘परिवार’ तथा ‘बचपन भास्कर का’ सामाजिक उपन्यास है। 


” ‘पानी के प्राचीर’, ‘जल टूटता हुआ’ तथा ‘सूखता हुआ तालाब’ में तो मुख्यतः गाँव के यथार्थ का चित्रण हुआ है।“  इसलिए ये पूर्ण आँचलिक उपन्यास की श्रेणी में माने जाते हैं। इनका कथा शिल्प भी आँचलिक उपन्यासों की ही तरह है। ”समकालीन कथा साहित्य में रामदरश मिश्र ने मूलतः एक आँचलिक उपन्यासकार के रूप में अपनी पहचान बनाई है।“ 


आँचलिक उपन्यासों में मुख्य कथा तथा प्रासंगिक कथाओं की विभाजन रेखा नहीं होती। बल्कि अनेक छोटे कथा-खंडों का परस्पर सगुफ्फन अँचल के बहुआयामी जीवन का चित्रण करता है जो कि मिश्र के आँचलिक उपन्यासों की विशेषता है। इन उपन्यासों में भाषा, कथा-वार्ता, परिवेश, पात्र सभी अँचल से लिए गए हैं। इनको पढ़ते ही इनमें अंचल की सौंधी महक आती है।


रामदरश जी के उपन्यासों के संदर्भ में प्रकाश मनु लिखते हैं कि - ”बहते-बहते उपन्यास के समाप्त होने पर जब सतह पर आते हैं तो प्रतीत होता है कि हम ‘पानी के प्राचीर’, ‘जल टूटता हुआ’, ‘सूखता हुआ तालाब’, पढ़ रहे थे या किसी अँचल में घूमने निकल गए थे।“ 


”आँचलिकता उनके अनुभव और अन्वेषण की मर्यादा नहीं, दिशा है।“ 


मिश्र के आँचलिक उपन्यासों की कथा संरचना एक नवीन रूप में दिखाई देती है। इनमें सामाजिक उपन्यासों की तरह समस्याओं को उठाने वाला कोई केन्द्रीय पात्र नहीं होता। कथा-नायक कोई चरित्र नहीं बल्कि पूरा परिवेश ही कथानायक होता है। मुख्य कथा अनेक छोटी-छोटी कथाओं में निर्मित होती है।


मिश्र के अन्य उपन्यास सामाजिक, उपन्यासों की श्रेणी में आते हैं। ”मिश्र के सामाजिक उपन्यास भी नायक प्रधान नहीं है, उनके सामाजिक उपन्यास भी मात्र पात्रों की मनःस्थितियों तक सीमित नहीं होते बल्कि मन की गहराइयों की यात्रा भी करते चलते हैं तथा उनमें समाज का यथार्थ चित्र भी उभरता चलता है।“ 


मिश्र के सामाजिक उपन्यास जीवन के यथार्थ दस्तावेज हें। आँचलिक उपन्यासों के समान इनमें भी परिवेश ही नायक की तरह जीवन के विविध आयामों को प्रदर्शित करते हुए आगे बढ़ता है। लेखक ऐतिहासिक घटनाओं का सहारा न लेकर, नवीन संदर्भों को जोड़कर कथा का सृजन करता है।


”प्रकृति और मानव, परंपरा और प्रगति तथा रूप-रस, गंध-स्पर्श, वग्र-तनाव आदि से मिलकर वे एक विशिष्ट कथा-विन्यास रचते हैं।“ 


मिश्र के सामाजिक उपन्यासों के पात्र एवं परिवेश कहीं न कहीं से अँचल से जुड जाते है। अतीत, वर्तमान या भविष्य किसी न किसी रूप में उनके उपन्यासों में अँचल आ ही जाता है। इन उपन्यासों की कथा गाँव और शहर से जुड़ी हुई है। उनका गाँव सर्वव्याप्त है। उनके इन उपन्यासों में भी गाँव और शहर को पृथक-पृथक नहीं किया जा सकता। ”शायद इसी कारण मिश्र जी का कथानक गाँव और शहर से जुड़कर यथार्थ की सर्वव्यापकता का बोध तथा जीवन के हर पहलू एवं प्रत्येक स्थिति का प्रत्यक्षीकरण कराता है।“ 


‘पानी के प्राचीर’, ‘जल टूटता हुआ’, ‘सूखता हुआ तालाब’  एवं ‘बीस बरस’ की कथावस्तु तो पूर्णतः आँचलिक जीवन से संबद्ध है। ‘बीच का समय’ की कथावस्तु गुजरात शहर से संबंधित है। लेकिन यहाँ मुख्य पात्र गाँव से जुड़ा है। ‘अपने लोग’ की कथावस्तु उत्तरप्रदेश शहर को अभिचित्रित करती है किंतु यहाँ भी पात्रों के व्यवहार और स्मृतियों में अँचल समाया हुआ है। ‘रात का सफर’, ‘आकाश की छत’, ‘बिना दरवाजे का मकान’ एवं ‘थकी हुई सुबह’, ‘बचपन भास्कर का’ तथा ‘एक था कलाकार’ के मुख्य पात्र रहते तो शहर में है लेकिन उनकी अतीत अँचल से जुड़ा हुआ है। 
 
‘दूसरा घर’ गुजरात प्रदेश के अहमदाबाद महानगर की गाथा है, जिसमें अहमदाबाद की चालों में रहने वाले पात्रों के द्वारा लेखक उत्तरप्रदेश के अँचल की सैर कराता है। अर्थात मिश्र के सामाजिक उपन्यासों के कथानक भले ही शहर पर आधारित हों फिर भी वे कहीं न कहीं से अँचल से जुड़कर पाठकों को आँचलिकता का अनुभव कराते हैं। इस प्रकार मिश्र के सामाजिक उपन्यास सामाजिक होते हुए भी कुछ हद तक आँचलिक है। यही कारण है कि मिश्र आँचलिक उपन्यासकार कहलाते हैं।


” ‘पानी के प्राचीर’, ‘जल टूटता हुआ’ और ‘सूखता हुआ तालाब’ में तो मुख्यतः गाँव के यथार्थ का चित्रण हुआ ही है, लेकिन उनके जिन उपन्यासों का सीधा संबंध शहरी जीवन से है उनके मुख्य पात्र अनुभव और सोच के धरातल पर हलके या गहरे रूप में गाँव से जुड़े होते हैं।“ 


संदर्भ ग्रंथ सूची:-
1. प्रतिबद्धता का सर्जनात्मक रूप, रचनाकार रामदरश मिश्र, डाॅ. महावीर सिंह चैहान, पृ. 194
2. प्रतिबद्धता का सर्जनात्मक रूप, रचनाकार रामदरश मिश्र, डाॅ. महावीर सिंह चैहान, पृ. 194
3. मनुष्य के होने की तरह सहज हैं, रामदरश मिश्र के उपन्यास, रामदरश मिश्र व्यक्ति और अभिव्यक्ति, प्रकाश मनु, पृ. 148
4. प्रतिबद्धता का सर्जनात्मक रूप, रचनाकार रामदरश मिश्र, डाॅ. महावीर सिंह चैहान, पृ. 194
5. रामदरश मिश्र के उपन्यासों की संरचना, रामदरश मिश्र व्यक्ति और अभिव्यक्ति डाॅ. सूर्यदीन यादव, पृ. 163
6. रामदरश मिश्र के उपन्यासों की संरचना, रामदरश मिश्र व्यक्ति और अभिव्यक्ति डाॅ. सूर्यदीन यादव, पृ. 163
7. रामदरश मिश्र के उपन्यासों की संरचना, रामदरश मिश्र व्यक्ति और अभिव्यक्ति, डाॅ. सूर्यदीन यादव, पृ. 163
8. रामदरश मिश्र की सृजन यात्रा, डाॅ. महावीर सिंह चैहान, पृ. 60


 



प्रस्तुतकर्ता:-
डाॅ. श्रीमती प्रतिमा यादव
डायरेक्टर 
कुंजीलाल दुबे संसदीय विद्यापीठ
भोपाल


निशा सिंह रघुवंशी 
सहायक प्राध्यापक (हिंदी)
कैरियर काॅलेज भोपाल


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