लघुकथा...  कोरोना..... 
डा. पंकज जैसे ही अस्पताल से घर लौटे तो उनकी बेटी प्रीति ने उन्हें टोका - " पापा आज मैनें टी. वी.पर देखा कि इटली में कोरोना पीड़ित लोगों की देखभाल कर रहे 13 डाक्टर कोरोना पाजिटिव पाये गये हैं. हो, सकता है, इस बीमारी से उनकी जान भी चली जाए." 

 

थोडा़ रुककर वो फिर, बोली -" पापा कुछ दिन अगर आप अस्पताल नहीं जाएंगे तो कौन सा पहाड़ टूट पडेगा"

 

 

तब, डा.पंकज अपनी प्यारी बेटी प्रीति को समझाते हुए बोले -"   बेटा, मानवता की सेवा करना डाक्टर का कर्तव्य होता है, अगर हम डाक्टर ही इन रोगियों के इलाज से मुंह 

फेर लेंगे तो फिर, उनका इलाज कैसे होगा ?जब हम अपने पेशे को अपनाते हैं, तो हमें ये शपथ लेनी पड़ती है कि हम हर हाल में मरीजों को देखेंगे, और उनका उपचार करेंगे! मानवता का यही धर्म होता है बेटा , और सभी डाक्टर रोगियों का इलाज करते हुए मर तो नहीं जाते! " 

 

यह कहते हुए डाक्टर पंकज वाशरुम की तरफ चले गये.

 

महेश कुमार केशरी 

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